हिंदी तर्जुमा
अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद द-वतित ताम्मा, वस्सलातिल क़ाइमा, आति मुहम्मदन-निल वसीलता वल फ़ज़ीला, वबअस-हू मक़ामम-महमूदन-निल्लज़ी व-अत्तह
ENGLISH TRANSLATION
Allahumma Rabba haadhihi-dda‘wat-it-taammah, was-salaat-il-qaa’ima, aati Muhammadan-il-waseelata wal-fadheelah, wab’ath-hu maqaaman mahmoodan-il-ladhi wa‘adtahu
मआख़िज़ (SOURCE)
सही बुखारी: 614, सही मुस्लिम: 384
अज़ान की आवाज़ हमारी रूह को एक अजीब सा सुकून और क़ल्बी इत्मीनान बख़्शती है। जब मुअज़्ज़िन की पुकार मुकम्मल होती है और फ़िज़ा में ख़ामोशी छा जाती है, तो वह वक़्त बहुत क़ीमती होता है। यह सिर्फ़ जमात के इंतज़ार का वक़्त नहीं, बल्कि अल्लाह ताला से जुड़ने का एक ख़ास मौक़ा है।
अगर आप इंटरनेट पर Dua after Azan तलाश कर रहे हैं, तो यहाँ हमने अज़ान के बाद पढ़ी जाने वाली मसनून दुआ को अरबी, हिंदी तलफ़्फ़ुज़ और तर्जुमे के साथ पेश किया है। इस दुआ को पढ़ना अपने रब को राज़ी करने और नबी-ए-करीम (ﷺ) से अपनी मोहब्बत का इज़हार करने का बेहतरीन ज़रिया है।
अज़ान के बाद दुआ क्यों पढ़ी जाती है? (Fazilat)
हमारे प्यारे नबी (ﷺ) ने हमें तालीम दी है कि अज़ान के बाद का वक़्त दुआओं की क़बूलियत का वक़्त है। यह दुआ सिर्फ़ चंद अल्फ़ाज़ नहीं हैं, बल्कि नबी (ﷺ) के लिए ‘वसीला’ (जन्नत का सबसे आला मक़ाम) माँगने का ज़रिया है।
हदीस शरीफ़ में आता है कि जो शख़्स अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए क़यामत के दिन नबी (ﷺ) की शफ़ाअत (सिफ़ारिश) हलाल (वाजिब) हो जाती है। इसलिए, दिन में पाँच बार मिलने वाले इस अज़ीम मौक़े को हरगिज़ ज़ाया नहीं करना चाहिए।
मसनून अज़ान के बाद की दुआ (Dua After Azan)
यहाँ वह सही और मसनून दुआ दी गई है जो अहादीस से साबित है। इसे आप अज़ान मुकम्मल होने के फ़ौरन बाद पढ़ें:
Arabic:
اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلاَةِ الْقَائِمَةِ آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
Hindi:
अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद दअवतित ताम्मति वस्सलातिल क़ाइमति आति मुहम्मदानिल वसीलता वल फ़ज़ीलता वबअसहु मक़ामम महमूदनिल्लज़ी वअदतहु।
Roman:
Allahumma Rabba haadhihi-dda‘wat-it-taammah, was-salaat-il-qaa’ima, aati Muhammadan-il-waseelata wal-fadheelah, wab’ath-hu maqaaman mahmoodan-il-ladhi wa‘adtahu.
तर्जुमा / मफ़हूम:
“ऐ अल्लाह! इस मुकम्मल पुकार (अज़ान) और क़ायम होने वाली नमाज़ के रब! हमारे नबी मुहम्मद (ﷺ) को वसीला और फ़ज़ीलत अता फ़रमा, और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद (तारीफ़ वाले मक़ाम) पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।” (हवाला: सहीह बुख़ारी: 614)
दुआ पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा और आदाब
इस दुआ की मुकम्मल बरकत और फ़ज़ीलत हासिल करने के लिए इन आदाब का ख़याल रखना निहायत ज़रूरी है:
- अज़ान का जवाब देना: दुआ पढ़ने से पहले अज़ान को ग़ौर से सुनें और मुअज़्ज़िन के कलिमात का जवाब दें (यानी जो मुअज़्ज़िन कहे, वही आहिस्ता आवाज़ में दोहराएं, सिवाय ‘हय्या अलस-सलाह’ और ‘हय्या अलल-फ़लाह’ के, जहाँ ‘ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह’ कहना चाहिए)।
- दुरूद शरीफ़ पढ़ना: अज़ान ख़त्म होने पर, दुआ से ठीक पहले नबी (ﷺ) पर दुरूद शरीफ़ (मसलन: दुरूद-ए-इब्राहीमी) पढ़ें।
- दुआ पढ़ना: इसके बाद ऊपर दी गई मसनून Dua after Azan पढ़ें।
- ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू: दुआ पढ़ते वक़्त अल्फ़ाज़ के मफ़हूम पर ग़ौर करें और दिल में आज़िज़ी रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: क्या हर अज़ान के बाद यह दुआ पढ़नी चाहिए?
जवाब: जी हाँ, फ़ज्र से लेकर ईशा तक, दिन की पांचों अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ना सुन्नत है और बहुत बड़े सवाब का बाइस है।
सवाल 2: अगर दुआ पूरी ज़बानी याद न हो तो क्या करें?
जवाब: शुरुआत में जब तक याद न हो, आप इसे अपने मोबाइल या किताब से देखकर पढ़ सकते हैं। अगर वक़्त कम हो, तो सिर्फ़ दुरूद शरीफ़ पढ़ लेना भी अफ़ज़ल है।
सवाल 3: क्या ख़्वातीन (औरतों) के लिए भी यह दुआ पढ़ना लाज़िम है?
जवाब: बिल्कुल, यह दुआ मर्द और औरत दोनों के लिए यकसां (बराबर) है। घर में अज़ान की आवाज़ आते ही ख़्वातीन भी अपनी दुनियावी मसरूफ़ियत रोककर अज़ान का जवाब दें और यह दुआ पढ़ें।
आख़िरी बात: सुकून और शफ़ाअत का ज़रिया
दिन भर की मसरूफ़ियत में अज़ान के ये चंद मिनट आपको अल्लाह ताला के क़रीब लाते हैं। जब भी अज़ान सुनाई दे, दुनियावी गुफ़्तगू रोक दें और इस मसनून दुआ का एहतेमाम करें।
यह छोटी सी आदत न सिर्फ़ आपके क़ल्ब (दिल) को सुकून देगी, बल्कि आख़िरत में नबी-ए-करीम (ﷺ) की शफ़ाअत भी नसीब कराएगी। अल्लाह ताला हम सबको सुन्नतों पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।