हिंदी तर्जुमा
नवैतु अन अग़तसिला मिन ग़ुस्ली लि रफ़्-इल हदस
ENGLISH TRANSLATION
Nawaitu an aqtasila min ghusli li raf‘il hadath
मआख़िज़ (SOURCE)
फिक़्ह की किताबें
दीन-ए-इस्लाम में पाकीज़गी (Taharat) और सफ़ाई को बहुत बड़ी अहमियत दी गई है। नबी-ए-करीम (ﷺ) का इरशाद है कि “पाकीज़गी आधा ईमान है।” हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नमाज़, क़ुरआन की तिलावत और दीगर इबादतों के लिए जिस्म और लिबास का पाक होना पहली शर्त है।
जब इंसान पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है (जैसे जनाबत या हैज़ के बाद), तो बग़ैर सही तरीक़े से नहाए वह पाक नहीं हो सकता। सिर्फ़ साबुन लगाकर पानी बहा लेना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि इसके लिए हदीस में बताए गए सुन्नत तरीक़े और फ़राएज़ को पूरा करना ज़रूरी है। इस मुकम्मल गाइड में हम Ghusl ka tarika, Janabat ke ghusl, और औरतों के लिए Haiz (Periods) के बाद पाकी हासिल करने का सही इस्लामी तरीक़ा तफ़सील से जानेंगे।
1. ग़ुस्ल के 3 फ़र्ज़ (Faraiz of Ghusl)
ग़ुस्ल करते वक़्त इन 3 कामों को करना फ़र्ज़ (Compulsory) है। अगर इनमें से एक भी छूट गया, तो ग़ुस्ल नहीं होगा और इंसान नापाक ही रहेगा:
- कुल्ली करना (Gargle): मुँह में पानी लेकर इस तरह कुल्ली करना कि पानी हलक़ (गले) की जड़ों तक पहुँच जाए। (अगर रोज़ा हो तो ग़रग़रा न करें, सिर्फ़ कुल्ली करें)।
- नाक में पानी डालना: नाक में पानी इस तरह चढ़ाना कि नरम हड्डी तक पहुँच जाए। (रोज़े की हालत में पानी ज़्यादा ऊपर न खींचे)।
- पूरे बदन पर पानी बहाना: सर के बालों से लेकर पैरों के नाखूनों तक पूरे जिस्म पर इस तरह पानी बहाना कि एक बाल के बराबर भी कोई जगह सूखी न रहे।
2. ग़ुस्ल का मुकम्मल सुन्नत तरीक़ा (Sunnat Method of Ghusl)
चाहे ग़ुस्ल जनाबत (Janabat) का हो या जुमे के दिन का, नबी-ए-करीम (ﷺ) का सुन्नत तरीक़ा (Step-by-Step) यह है:
- नीयत करना: सबसे पहले दिल में पाकी हासिल करने की नीयत करें (नीयत दिल के इरादे का नाम है, ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं)।
- हाथ धोना: सबसे पहले दोनों हाथों को गट्टों (कलाई) तक 3 बार धोएं।
- इस्तिंजा करना (Private parts धोना): फिर अपने प्राइवेट पार्ट्स (शर्मगाह) को अच्छी तरह धोएं और अगर बदन पर कहीं नापाकी लगी हो, तो उसे साफ़ करें।
- मुकम्मल वुज़ू करना: इसके बाद उसी तरह मुकम्मल वुज़ू करें जैसे नमाज़ के लिए करते हैं। (अगर आप ऐसी जगह नहा रहे हैं जहाँ पानी जमा हो रहा है, तो पैरों को आख़िर में धोएं)।
- सर पर पानी डालना: अब अपने सर पर 3 बार पानी डालें और बालों की जड़ों में उंगलियों से ख़िलाल करें ताकि पानी जड़ों तक पहुँच जाए।
- दाएँ और बाएँ पानी बहाना: इसके बाद 3 बार अपने दाएँ (Right) कंधे पर और फिर 3 बार बाएँ (Left) कंधे पर पानी बहाएं।
- पूरे जिस्म को धोना: आख़िर में पूरे जिस्म पर अच्छी तरह पानी बहा लें और हाथ फेर कर साफ़ कर लें ताकि कोई जगह सूखी न रहे।
3. जनाबत के ग़ुस्ल का तरीक़ा (Ghusl for Janabat)
हक़-ए-ज़ौजियत (हमबिस्तरी) या एहतेलाम (Wet dream) के बाद इंसान पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो जाता है, जिसे जनाबत कहते हैं। जनाबत की हालत में नमाज़ पढ़ना, क़ुरआन छूना या मस्जिद में दाख़िल होना मना है।
जनाबत के ग़ुस्ल का तरीक़ा बिल्कुल वही है जो ऊपर “सुन्नत तरीक़े” में बताया गया है। बस इसमें यह ख़्याल रखना ज़रूरी है कि ग़ुस्ल में ताख़ीर (देरी) न करें। अगर रात में ग़ुस्ल फ़र्ज़ हुआ है, तो कम से कम वुज़ू करके सोएं और सुब्ह फ़ज्र से पहले ग़ुस्ल कर लें।
4. हैज़ और निफ़ास के बाद ग़ुस्ल का तरीक़ा (Ghusl after Haiz / Periods)
औरतों के लिए हैज़ (Periods) और निफ़ास (बच्चे की पैदाइश के बाद का ख़ून) के रुकने के बाद ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ है। ख़वातीन (औरतों) के लिए ग़ुस्ल का तरीक़ा भी आम सुन्नत तरीक़े जैसा ही है, लेकिन कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:
- बालों का खोलना: अगर बाल गुंथे हुए (Braided) हैं, तो अगर पानी बालों की जड़ों तक पहुँच रहा है, तो चोटी खोलने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन अगर बाल बहुत घने हैं और जड़ों तक पानी नहीं पहुँच रहा, तो बालों को खोलकर जड़ों तक पानी पहुँचाना फ़र्ज़ है।
- बदबू दूर करना: हज़रत आयशा (रज़ि.) की हदीस के मुताबिक़, हैज़ के ग़ुस्ल के बाद किसी ख़ुशबूदार चीज़ (जैसे इत्र लगा हुआ रुई का फाहा) से शर्मगाह के आस-पास की जगह को साफ़ करना सुन्नत है ताकि ख़ून की बदबू ख़त्म हो जाए।
- नाखून पॉलिश हटाना: अगर नाखूनों पर नेल पॉलिश लगी है, तो ग़ुस्ल से पहले उसे हटाना फ़र्ज़ है, क्योंकि इसके होते हुए पानी नाखून तक नहीं पहुँचता और ग़ुस्ल नहीं होता। (मेहंदी का रंग लगा हो तो कोई हर्ज़ नहीं)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)
सवाल: क्या ग़ुस्ल करते वक़्त दुआ पढ़ सकते हैं?
जवाब: अगर आप बाथरूम (जहाँ टॉयलेट भी साथ हो) में नहा रहे हैं, तो ज़बान से अल्लाह का नाम लेना या कोई दुआ पढ़ना मना है। नीयत दिल में करें और बाहर आकर दुआ पढ़ें।
सवाल: क्या बग़ैर कपड़ों के (Naked) ग़ुस्ल किया जा सकता है?
जवाब: बंद गुसलख़ाने (Bathroom) में जहाँ कोई देख न सके, बग़ैर लिबास के नहाने की इजाज़त है। लेकिन बेहतर और अफ़ज़ल यह है कि कोई कपड़ा (जैसे तहमद) बांध कर नहाया जाए, क्योंकि अल्लाह हया का ज़्यादा हक़दार है।
सवाल: क्या शॉवर (Shower) के नीचे नहाने से ग़ुस्ल हो जाता है?
जवाब: जी हाँ, अगर शॉवर के नीचे नहाते वक़्त ग़ुस्ल के तीनों फ़र्ज़ (कुल्ली करना, नाक में पानी डालना, और पूरे जिस्म पर पानी बहाना) पूरे हो रहे हैं, तो ग़ुस्ल बिल्कुल हो जाएगा।
अल्लाह ताला हम सबको ज़ाहिरी और बातिनी पाकीज़गी हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।