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Safai ki dua (toilet dua) | सफ़ाई की दुआ (टॉयलेट दुआ)

December 19, 2025

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ

हिंदी तर्जुमा

अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल खु़बुसि वल ख़बाइस।

ENGLISH TRANSLATION

Allahumma inni auzu bika minal khubusi wal khbais.

मआख़िज़ (SOURCE)

Sahih al-Bukhari

सफ़ाई और इबादत का ताल्लुक

इस्लाम में सफ़ाई और पाकीज़गी को बहुत ऊंचा मकाम दिया गया है। हमारे दीन में पाकी को ‘आधा ईमान’ कहा गया है। जब हम जिस्मानी तौर पर पाक रहते हैं, तभी हमारी इबादतें अल्लाह के दरबार में मक़बूल होती हैं। रोज़ाना की गंदगी और नापाकी से खुद को बचाना सिर्फ एक ज़रूरत नहीं, बल्कि सुन्नत पर अमल करना है। टॉयलेट (ब़ैतुल-ख़ला) जाने और वहां से आने की दुआएं हमें शैतानी असरत और गंदगी से महफ़ूज़ रखती हैं।


टॉयलेट जाने से पहले की दुआ

जब आप टॉयलेट जाने का इरादा करें, तो अंदर दाख़िल होने से पहले यह दुआ पढ़ें। याद रहे कि अंदर जाने से पहले अपना बायां (Left) पैर अंदर रखें।

Arabic Dua

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ

तलफ़्फ़ुज़ (Pronunciation)

  • Devanagari: अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल खु़बुसि वल ख़बाइस।
  • Roman: Allahumma inni a’udhu bika minal khubuthi wal khaba’ith.

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! मैं नापाक जिन्नों (नर और मादा) से तेरी पनाह मांगता हूं।


टॉयलेट से बाहर आने के बाद की दुआ

जब आप टॉयलेट से बाहर निकलें, तो पहले अपना दायां (Right) पैर बाहर निकालें और यह दुआ पढ़ें:

Arabic Dua

غُفْرَانَكَ

तलफ़्फ़ुज़ (Pronunciation)

  • Devanagari: गुफ़्रानका।
  • Roman: Ghufranaka.

तर्जुमा

(ऐ अल्लाह) मैं तुझसे मग़फ़िरत (माफ़ी) चाहता हूं।

म़स्दर (ह़दीस का हवाला)

यह दुआएं सहीह बुखारी (ह़दीस: 142) और सुनन इब्ने माजह (ह़दीस: 300) जैसी मोतबर किताबों से साबित हैं।


सफ़ाई के आदाब इस्लाम में

टॉयलेट का इस्तेमाल करते वक़्त इन सुन्नतों का ख्याल रखना ज़रुरी है:

  • अंदर जाने से पहले सर ढांपना मुस्तहब है।
  • अंदर जाते वक़्त कोई ऐसी चीज़ न ले जाएं जिस पर अल्लाह या रसूल का नाम लिखा हो।
  • टॉयलेट के अंदर बातें करने से परहेज़ करें।
  • इस्तिंजा (पाकी) के लिए हमेशा बाएं हाथ का इस्तेमाल करें।
  • क़िब्ला की तरफ़ मुंह या पीठ करके न बैठें।

आम ग़लतियां

अक्सर लोग इन बातों में चूक कर जाते हैं:

  1. दुआ अंदर जाकर पढ़ना: दुआ हमेशा टॉयलेट की चौखट के बाहर ही पढ़ लेनी चाहिए।
  2. खड़े होकर पेशाब करना: बिना किसी सख़्त मजबूरी के खड़े होकर पेशाब करना सुन्नत के ख़िलाफ़ है।
  3. छीटों से न बचना: पेशाब की छीटों से न बचना सख़्त गुनाह है, इससे कब्र का अज़ाब होता है।

ज़रूरी सवालात (Q&A)

क्या यह दुआ दिल में भी पढ़ सकते हैं?

जी हां, अगर आप टॉयलेट के अंदर पहुंच गए हैं और दुआ पढ़ना भूल गए थे, तो ज़ुबान से न कहें बल्कि सिर्फ दिल में दोहरा लें।

बच्चों को कैसे सिखाएं?

बच्चों को टॉयलेट के दरवाज़े पर यह दुआ लिखकर लगा दें। उन्हें बार-बार याद दिलाएं कि बायां पैर पहले अंदर रखना है।

अगर दुआ भूल जाएं तो क्या करें?

जैसे ही याद आए दिल में अल्लाह से पनाह मांग लें। बाहर निकलने के बाद ‘गुफ़्रानका’ ज़रूर पढ़ें।


छोटी दुआ, बड़ा सवाब

रोज़ाना के ये छोटे-छोटे आमाल हमें अल्लाह के करीब करते हैं। जब हम सुन्नत के मुताबिक़ टॉयलेट जाते हैं, तो वह वक़्त भी इबादत में गिना जाता है और हम बीमारियों व शैतानी वसवसों से महफ़ूज़ रहते हैं।

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