Ramadan and Fasting Duas

Roza Kholne Ki Dua (Iftar Dua) | रोज़ा खोलने की दुआ

March 1, 2025

اللهم إني لك صمت وبك آمنت وعليك توكلت وعلى رزقك أفطرت

हिंदी तर्जुमा

अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अलैका तवक्कलतु व अला रिज़्क़िका अफ़्तरतु

ENGLISH TRANSLATION

Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa ‘alaika tawakkaltu wa ‘ala rizqika-aftartu

मआख़िज़ (SOURCE)

अबू दाऊद (2358), दारमी

रमज़ान के मुबारक महीने में पूरा दिन भूखा-प्यासा रहने के बाद जब शाम को इफ़्तार का वक़्त आता है, तो वह लम्हा बहुत क़ीमती होता है। दस्तरख़्वान पर अल्लाह की नेमतें—खजूर, पानी और फल—सामने होते हैं, और दिल में अल्लाह के लिए बेपनाह शुक्र होता है।

रोज़ेदार के लिए यह सिर्फ़ खाना खाने का वक़्त नहीं, बल्कि अपनी इबादत को अल्लाह के दरबार में पेश करने का वक़्त है। Roza Kholne Ki Dua पढ़कर हम इस बात का इक़रार करते हैं कि यह रोज़ा सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए था।

इफ़्तार का वक़्त और दुआ की अहमियत

हदीस में आता है कि रोज़ेदार की दुआ इफ़्तार के वक़्त रद्द नहीं की जाती। यह क़बूलियत की घड़ी होती है।

अक्सर भूख और प्यास की शिद्दत में हम दुआ मांगना भूल जाते हैं। लेकिन हमें चाहिए कि इफ़्तार से चंद मिनट पहले खामोशी से बैठें और अल्लाह से अपने लिए और अपनों के लिए दुआ मांगें। Iftar Dua पढ़ना सुन्नत भी है और अल्लाह का शुक्र अदा करने का बेहतरीन तरीक़ा भी।

Roza Kholne Ki Dua (रोज़ा खोलने की दुआएं)

हिंदुस्तान और आस-पास के इलाक़ों में दो तरह की दुआएं मशहूर हैं। यहाँ दोनों दी जा रही हैं ताकि आप आसानी से समझ सकें और पढ़ सकें।

1. मशहूर दुआ (जो अक्सर पढ़ी जाती है)

उत्तर भारत (North India) में ज़्यादातर लोग यही दुआ पढ़ते आ रहे हैं। इसमें अल्लाह पर ईमान, भरोसे और रिज़्क़ का ज़िक्र बहुत प्यारे अंदाज़ में है।

अरबी (Arabic):

اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ

तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari):

अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु, व बिका आमन्तु, व अलैका तवक्कलतु, व अला रिज़्क़िका अफ़तरतु

तलफ़्फ़ुज़ (Hinglish):

Allahumma inni laka sumtu, wa bika aamantu, wa ‘alayka tawakkaltu, wa ‘ala rizqika aftartu

तर्जुमा (Meaning):

“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे ही लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे ही दिए हुए रिज़्क़ से इफ़्तार किया।”

(नोट: यह दुआ अवाम में बहुत मक़बूल है और इसके मानी बिल्कुल दुरुस्त हैं।)


2. सहीह हदीस वाली दुआ (Sunnah Dua)

यह दुआ हदीस की किताबों (अबू दाऊद) में मिलती है और हमारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इफ़्तार के बाद (पानी पीने के बाद) अक्सर यह पढ़ते थे।

अरबी (Arabic):

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الْأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari):

ज़हब ज़-ज़म-उ वब्-तल्ल-तिल उरूक़, व सबतल अजरु इन्शा-अल्लाह

तलफ़्फ़ुज़ (Hinglish):

Zahaba az-zama-u wab-tallatil ‘urooq, wa sabatal ajru insha-Allah

तर्जुमा (Meaning):

“प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं और अल्लाह ने चाहा तो सवाब (अजर) पक्का हो गया।”

(मसदर: अबू दाऊद 2357)

Iftar Dua कब और कैसे पढ़ें? (सही तरीक़ा)

बहुत से लोगों को उलझन रहती है कि दुआ खजूर खाने से पहले पढ़ें या बाद में। यहाँ आसान तरीक़ा समझें:

  1. इफ़्तार से ठीक पहले: दस्तरख़्वान पर बैठकर अल्लाह से दुआ मांगें। यह क़बूलियत का वक़्त है।
  2. रोज़ा खोलते वक़्त: जैसे ही अज़ान हो, “बिस्मिल्लाह” (Bismillah) कहें और खजूर या पानी से रोज़ा खोलें।
  3. दुआ कब पढ़ें:
    • अगर आप “अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु…” (मशहूर दुआ) पढ़ रहे हैं, तो इसे बिस्मिल्लाह के साथ या खजूर खाने से ठीक पहले पढ़ सकते हैं।
    • अगर आप “ज़हब ज़-ज़म-उ…” (सुन्नत दुआ) पढ़ रहे हैं, तो इसे पानी पीने के बाद पढ़ें, क्योंकि इसमें “प्यास बुझने” का ज़िक्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. क्या दुआ याद न हो तो रोज़ा नहीं खुलेगा?

ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर आपको अरबी दुआ याद नहीं है, तो आप अपनी ज़ुबान (Hindi/Urdu) में भी अल्लाह का शुक्र अदा कर सकते हैं, या सिर्फ़ “बिस्मिल्लाह” कहकर रोज़ा खोल लें। रोज़ा क़बूल हो जाएगा।

2. क्या दोनों दुआएं एक साथ पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, कोई मनाही नहीं है। आप अल्लाह की तारीफ़ और शुक्र जितने ज़्यादा अल्फाज़ में करें, उतना अच्छा है। लेकिन सुन्नत तरीक़ा सादगी का है।

3. अगर ग़लती से वक़्त से पहले रोज़ा खोल लिया तो?

अगर आपने जानबूझ कर नहीं किया और ग़लती से वक़्त का अंदाज़ा ग़लत हुआ, तो तौबा करें और बाद में उस रोज़े की क़ज़ा रखें (एहतियात के तौर पर किसी आलिम से मसला पूछ लें)।

शुक्र और दुआ के साथ इफ़्तार

रमज़ान का महीना हमें सब्र और शुक्र सिखाता है। इफ़्तार का वक़्त भूख मिटाने से ज़्यादा रूह को सुकून देने का वक़्त है। Roza Kholne Ki Dua पढ़ते वक़्त दिल में यह अहसास रखें कि “या अल्लाह, यह तेरा करम है कि तूने मुझे आज का रोज़ा पूरा करने की तौफ़ीक़ दी।”

अल्लाह हम सबकी इबादतों को क़बूल फ़रमाए और हमारे घरों में बरकत अता करे। आमीन।

roza kholne ki dua

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