Ramadan and Fasting Duas

Sehri Ki Dua In Hindi | Roza Rakhne Ki Dua (अरबी, रोमन और तर्जुमे के साथ)

March 1, 2025

وَبِصَوْمِ غَدٍ نَوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَان

हिंदी तर्जुमा

व बि-सौमि ग़दिन नवैतु मिन शह्रि रमज़ान

ENGLISH TRANSLATION

W bi-saumi ghdin nawaitu min shahri ramazan

मआख़िज़ (SOURCE)

फिक़्ह की किताबें

रमज़ान-उल-मुबारक में सहरी का वक़्त बड़ा ही पुर-नूर और बरकत वाला होता है। अक्सर लोग इंटरनेट पर Sehri ki dua या Roza rakhne ki dua तलाश करते हैं। सहरी खाना सुन्नत है, और इसे खाने के बाद रोज़े की नीयत करना हमारे इरादे को और पुख़्ता (मज़बूत) कर देता है।

यहाँ हमने सहरी की मशहूर दुआओं को अरबी, हिंदी तलफ़्फ़ुज़, आसान रोमन और तर्जुमे के साथ पेश किया है ताकि आप इसे आसानी से ज़हन-नशीन कर सकें।


मशहूर सहरी की दुआ (Mashhoor Sehri Ki Dua)

यह दुआ सबसे मुकम्मल मानी जाती है और ज़्यादातर लोग सहरी खाने के बाद, लेकिन फ़जर (Fajr) का वक़्त शुरू होने से पहले इसी को पढ़ते हैं।

Arabic:

نَوَيْتُ أَنْ أَصُومَ غَدًا مِنْ فَرْضِ شَهْرِ رَمَضَانَ لِلّٰهِ تَعَالٰى

Hindi:

नवैतु अन असूम ग़दन मिन फ़र्दि शह्रि रमज़ान लिल्लाहि तआला

Roman:

Navaitu an asuma ghadan min fardi shahri ramadan lillahi ta’ala.

तर्जुमा / मफ़हूम:

“मैने नीयत (इरादा) की कि मैं कल रमज़ान के फ़र्ज़ रोज़े का रोज़ा रखूँगा, अल्लाह तआला के वास्ते।”


दूसरी मुख़्तसर दुआ (Short Sehri Ki Dua)

अगर वक़्त कम हो या बड़ी दुआ याद न हो, तो यह मुख़्तसर (छोटी) दुआ भी पढ़ी जा सकती है। इसका मफ़हूम भी वही है।

Arabic:

وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ

Hindi:

व बि-सौमि ग़दिन नवैतु मिन शह्रि रमज़ान

Roman:

Wa bi-sawmi ghadin navaitu min shahri ramadan.

तर्जुमा / मफ़हूम:

“और मैंने रमज़ान के कल के रोज़े की नीयत की।”


नीयत दिल से होती है, सिर्फ़ ज़बान से नहीं

यह जानना निहायत लाज़िम है कि इस्लाम में नीयत का असल मक़ाम “दिल” है। उलेमा-ए-कराम फ़रमाते हैं कि अगर आपने दिल में पक्का इरादा कर लिया कि “कल मैं रोज़ा रखूँगा”, और आप इसी इरादे से सहरी के लिए बेदार हुए (उठे), तो आपकी नीयत मुकम्मल हो गई।

ऊपर दी गई Roza Rakhne Ki Dua एक ज़रिया है अपने इरादे को अल्फ़ाज़ देने का। अगर कोई शख़्स सहरी के वक़्त ज़बान से दुआ न पढ़ पाए और दिल में इरादा हो, तब भी उसका रोज़ा दुरुस्त माना जाएगा। अल्फ़ाज़ को लेकर ज़्यादा फ़िक्रमंद होने के बजाय, दिल के ख़ुलूस और अल्लाह की रज़ा पर तवज्जो दें।


सहरी के वक़्त के आदाब (Adab of Sehri)

  • वक़्त की पाबंदी: सहरी हमेशा सुब्ह-ए-सादिक़ (फ़जर की अज़ान) से पहले मुकम्मल कर लें। अज़ान शुरू होने के बाद खाना-पीना दुरुस्त नहीं है।
  • दुआ की क़बूलियत: सहरी का वक़्त दुआओं की क़बूलियत का वक़्त होता है, इसलिए अपने हक़ में और उम्मत के लिए दुआ ज़रूर करें।
  • तहज्जुद और ज़िक्र: अगर वक़्त मिले तो सहरी से पहले 2 रकात तहज्जुद पढ़ लें, यह अल्लाह ताला से मांगने का बेहतरीन वक़्त है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Sehri Ki Dua FAQs)

सवाल 1: क्या बग़ैर दुआ पढ़े रोज़ा हो जाता है?
जवाब: जी हाँ। अगर आपने दिल में इरादा कर लिया था और सहरी खाई थी, तो बग़ैर ज़बान से दुआ पढ़े भी आपका रोज़ा हो जाएगा। नीयत दिल के इरादे का नाम है।

सवाल 2: क्या सहरी के बाद नीयत कर सकते हैं?
जवाब: बेहतर यही है कि सहरी के वक़्त या फ़जर से पहले नीयत कर ली जाए। लेकिन अगर किसी वजह से आँख नहीं खुली, तो दोपहर (ज़वाल) से पहले तक भी रोज़े की नीयत की जा सकती है, बशर्ते सुब्ह से कुछ खाया-पिया न हो।

सवाल 3: क्या ख़्वातीन और बच्चे भी यह दुआ पढ़ सकते हैं?
जवाब: बिल्कुल। घर की ख़्वातीन (औरतें), बुज़ुर्ग और बच्चे सभी यह दुआ पढ़ सकते हैं। बच्चों को यह दुआ याद कराना उनके अंदर रोज़े का शौक़ पैदा करता है।


आख़िरी बात: सब्र और तक़्वा

रोज़ा सिर्फ़ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह सब्र और तक़्वा का नाम है। जब आप Sehri ki dua पढ़कर रोज़े का आग़ाज़ करें, तो कोशिश करें कि पूरा दिन ग़ीबत, झूठ और बुराई से बचें। अल्लाह ताला हम सबकी नीयतों को क़बूल फ़रमाए। आमीन।

roza rakhne ki dua

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